सद्गुरु के सान्निध्य में शिष्य के रोम-रोम में अनाहद नाद (स्वतः उत्पन्न ध्वनि) और अजपा जाप (बिना प्रयास के चलने वाला मंत्र जाप) सक्रिय...
पिताजी साहब जिस समय किसी भी शिष्य को शिष्य बन उसके अंदर अपनी आध्यत्मिक ऊर्जा रोपित करते थे तो उसके बाद शिष्य जैसे जैसे...
आंतरिक्ष (स्पेस) में ऊर्जा तो होती है, लेकिन वहाँ प्रकाश या अंधेरा अपने पारंपरिक रूप में मौजूद नहीं होता, क्योंकि प्रकाश को देखने के...
अनाहत चक्र और सहस्रार चक्र की भूमिका अनाहत चक्र (हृदय चक्र) यह चक्र प्रेम, करुणा, और दिव्य ऊर्जा का केंद्र है। यहाँ पर नाद...
गुरु-शिष्य परंपरा में कई तरह की बाधाएँ और मानसिक अवस्थाएँ देखने को मिलती हैं। क्योंकि सच्चे गुरु को पहचानना कठिन है। आजकल नकली गुरुओं...
नास्तिक (Atheist) और आस्तिक (Theist) का आधार मुख्य रूप से ईश्वर, आत्मा, और अलौकिक शक्तियों पर विश्वास या अविश्वास पर निर्भर करता है। आस्तिक...
सूफी का आध्यात्मिक अर्थ गहरे आत्मिक अनुभव, प्रेम और ईश्वर के साथ एकत्व की भावना से जुड़ा हुआ है। सूफीवाद इस्लामी रहस्यवाद (Mysticism) की...
ध्वनि का शरीर और मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जब ध्वनि विशेष रूप से धुनात्मक (संगीतात्मक या कंपनयुक्त) होती है और उसे ध्यान...
प्रेम सबसे शक्तिशाली और सरल मार्ग है, जो सीधे हृदय से जुड़ता है। संतों और भक्तों ने प्रेम को ही परमात्मा तक पहुँचने का...
भक्ति और ज्ञान—ये दोनों ही आध्यात्मिक मार्ग हैं, लेकिन इनकी प्रकृति अलग-अलग है। कुछ संत भक्ति को श्रेष्ठ मानते हैं, तो कुछ ज्ञान को।...