उठा तो मन मे प्रश्न आया —वह गीता, गुरु-तत्त्व और शिष्य-मार्ग का अत्यंत गूढ़ और सत्य स्वरूप है।यह कथन केवल उपदेश नहीं, अनुभवजन्य सत्य...
जिस व्यक्ति ने अपने “मैं” (अहंकार) को गुरु/ईश्वर के हवाले कर दिया,जो स्वयं से मुक्त हो गया — अर्थात् कर्ता-भाव और भोक्ता-भाव से छूट...
गीता का अद्वैत और सूफी “फ़ना” — दोनों एक ही सत्य की दो भाषाएँ हैं।एक संस्कृत में बोली गई, दूसरी इश्क़ में।गीता में “एक...
जीत जाऊंगा ये जंग जो तुम मेरे साथ चलोसच कहता हूं जो नही चले तो लौट न पाएंगे हम तुमये मेरे दिल।की।पुकार है जो...
इंसान का ग्रहस्थ जीवन के कर्तेव्य ओर गुरु के प्रति आस्था मंजिल।पाने के लिए त्याग समर्पण और सहनशीलता विनम्रता ओर घर के करतेवयो के...
जीवन मे पिता के ज्ञान और सय्यंम संर्पित्ता व उनके गुणों के पाने के लिए उनके व्यवहार और ज्ञान को समझना चाहता था पर...
गुरु का देह रूप तो सबको दिखता है — वही सामान्य दृष्टि है।पर गुरु के हृदय में कौन विराजमान है, यह केवल वही जान...
कर्म के अनुसार जन्म और कर्म करने को स्वतंत्र फिर भी हमारी इचछाये असीमित है हम परमात्मा से मांगते है और हमारी भावनाएं ब्रह्मण्ड...
ईश्वर से मिलाने वाली साधना एक ही है — भक्ति,और भक्ति का प्राण है दिल से किया गया समर्पणयुक्त इल्म (ज्ञान)।यहाँ इल्म केवल पढ़ा-सुना...
अगर कोई साधक एक मत हो कर नाद को लगातार महसूस कर निर्लिप्त समाधि में लय हो जाये तो उसे वो मुकाम हकसिल हो...