यह भाव ही सबसे बड़ी पेशकश है।यह पंक्ति समर्पण की पराकाष्ठा कहती हैआज पूज्य दादा ठाकुर राम सिंह जी की पुण्य तिथि है उनके...
परमात्मा — निराकार भी है और साकार भी।उसी तरह गुरु और शिष्य भी केवल देह नहीं हैं, न ही केवल विचार —वे चेतना के...
लेकिन अगर तुम्हें इस दिल को बेदार करना है,इस दिल को जागृत करना है,और इसे अल्लाह–अल्लाह, ईश्वर–ईश्वर की धड़कन में लगाना है—तो इसके लिए...
इबादत वह मार्ग है जहाँनियम हैअनुशासन हैविधि है“मैं करता हूँ” की भावना हैनमाज़, पूजा, जप, व्रत, ध्यान — ये सब इबादत हैं।यह साधक को...
भक्ति कोई कर्मकांड नहीं,कोई सिद्धांत नहीं—भक्ति तो प्रेम का वह धागा हैजो जीव को सीधे ईश्वर के हृदय से बाँध देता है।यह धागा दिखाई...
संजय व खाटू श्याम दिव्य दृसटामहाभारत, भक्ति परंपरा और आध्यात्मिक चेतना—तीनों को जोड़ता है। इसे कथा, प्रतीक और आध्यात्मिक रहस्य—तीनों स्तरों पर समझना उचित...
केवट और शबरी —रामायण में घटनाएँ नहीं,चेतना की अवस्थाएँ हैं। केवट और शबरी का प्रेम : आध्यात्मिक अर्थकेवट — “मैं डुबा था, अब नहीं”केवट...
यह विषय डर या दंड का नहीं,चेतना–परिवर्तन और कर्म-बोध का है।गरुड़ पुराण को भयग्रंथ नहीं,मृत्यु–उपदेश की तरह पढ़ें।गरुड़ पुराण : आध्यात्मिक पाठ(मृत्यु के बाद...
चेतना का नाटक (रामायण = आन्तरिक यात्रा)कैकई द्वारा चाहराम — शुद्ध साक्षी चेतनाजो न चाहता है, न टालता है।जो घटता है, उसे पूर्ण स्वीकृति...
यह प्रश्न पुराण-कथा से अधिक आध्यात्मिक प्रतीक (symbolism) का है।विष्णु का शेषनाग की शय्या पर शयन — एक गूढ़ तत्त्व-बोध है।आइए इसे तीन स्तरों...