गुरु से मार्गदर्शन कब और कैसे मांगें, इसके लिए मुख्य बातें इस प्रकार हैं:कब मांगे मार्गदर्शनजब साधना या जीवन के किसी भी क्षेत्र में...
पतांजलि योग के अनुसार ध्यान और समाधि की प्राप्ति अष्टांग योग के आठ चरणों के पालन से होती है: यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार,...
किसी भी उच्च कोटि के संत जो गद्दी नसीन होते है और पूर्ण होते है उन संत के द्वारा नियम पूरक दीक्षित कर बैत...
इंसान की हक़ीक़त उसका शरीर (जिस्म) नहीं, बल्कि उसकी असली हक़ीक़त उसकी आत्मा (रूह) है। आचार्य प्रशांत के अनुसार आत्मा परम सत्य है, जो...
अध्याय: गुरु-निजशब्द और आत्म-एकत्व का रहस्य१. उपोद्घातउपनिषदों में कहा गया है कि ब्रह्मविद्या वही है जो श्रोतव्य, मन्तव्य, और निदिध्यासन के माध्यम से शिष्य...
दो श्लोक-संहिता की विस्तृत व्याख्या के साथ एक संयोजित अध्याय बनाकर प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसमें उपनिषद-गुरुकृपा, कबीर-नाम, और गुरु-शिष्य परंपराओं के उद्धरण सम्मिलित...
द्वैत और अद्वैत के मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:1. अस्तित्व की व्याख्याद्वैत: द्वैत दर्शन में माना जाता है कि ब्रह्म (परमात्मा), जीव (आत्मा) और जगत्...
अनाहद (अनाहत) नाद के बाद अध्यात्म में स्थिति और अनुभव गहन होते हैं। अनाहद नाद वह आध्यात्मिक नाद या आवाज़ है जो किसी भी...
“स्वम् को जानना” अर्थात अपनी असली पहचान को समझना, भारतीय दर्शन व योग मार्ग की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है। यदि जीवन मुक्त...
प्रेम, भक्ति, ज्ञान और विश्वास भारतीय अध्यात्म में एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए चार मूल तत्व हैं। इनका अलग-अलग भी महत्व है, परंतु जब...