Guru Ji

ब्रह्म-नाव का रहस्य: निरालंब ध्यान में आत्मा की भवसागर पार यात्रा

भाई राकेश आपका प्रश्न बहुत ही गहरी आध्यत्मिक अनिभूति की ओर ले जाता है बवास्तव में जब शिष्य में पूर्णता आती है ऐसी स्तिथि...

Read More

मुर्शिद से रुहानी ताल्लुक़: बैअत, समर्पण और आत्मिक उन्नति का मार्ग

मुर्शिद के साथ आध्यात्मिक ताल्लुक निभाने के लिए पूर्ण समर्पण, नियमित स्मरण और आंतरिक अनुशासन आवश्यक है। यह रिश्ता बैअत से मजबूत होता है,...

Read More

गुरु-स्मरण से समाधि तक: मौन साधना में चेतना का विकास

मौन में गुरु की उपस्थिति के अनुभव साधक के आध्यात्मिक स्तर के अनुसार भिन्न होते हैं, प्रारंभिक से उच्चतम अवस्था तक। ये अनुभव चित्त...

Read More

अनाहत चक्र से ब्रह्मानुभूति तक: अनाहद नाद का रहस्यमय अनुभव

अनाहद नाद मुख्य रूप से कुंडलिनी जागरण, समाधि अवस्था और नाद योग की साधना से जुड़ा आध्यात्मिक अनुभव है। यह चेतना के विस्तार और...

Read More

शांगरी-ला का प्राचीन रहस्य: महाभारत के सिद्धाश्रम से सतलोक तक

शांगरी-ला घाटी महाभारत में प्रत्यक्ष रूप से “शांगरी-ला” नाम से नहीं उल्लिखित है, बल्कि इसे सिद्धाश्रम या ज्ञानगंज के रूप में वर्णित किया गया...

Read More

वेदांत और नादयोग में आत्मा-परमात्मा की पहचान

आत्मा व परमात्मा की पहचानवेदांत की परंपरा में ठीक यही सिद्धांत प्रतिपादित है—आत्मानं विद्धि (आत्मा को जानो), क्योंकि आत्मा ही परमात्मा का प्रतिबिंब है।...

Read More