Author: Guru Ji

भाई साहब राकेश जी आपने बहुत सूक्ष्म और गूढ़ बात कही है—यह समझ से नहीं, देखने से पकड़ी जाती है। आप जिस “समय” की...

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कामिल मुर्शिद की पहचान: दावा नहीं, हाल की गवाही

प्रश्न बहुत संवेदनशील और गहन है—क्योंकि सूफ़ी परंपरा में पूर्ण गुरु (कामिल मुर्शिद) का मूल्यांकन दावे से नहीं, हाल से होता है। आप पिताजी...

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आपने जिस बात को संकेत रूप में कहा है, वह अध्यात्म का अत्यंत गूढ़ सूत्र है। मैं इस राज को साधक को बताता हूं...

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जो मिट गया, वही पा गया

जिस व्यक्ति ने अपने “मैं” (अहंकार) को गुरु/ईश्वर के हवाले कर दिया,जो स्वयं से मुक्त हो गया — अर्थात् कर्ता-भाव और भोक्ता-भाव से छूट...

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