भाई साहब राकेश जी आपने बहुत सूक्ष्म और गूढ़ बात कही है—यह समझ से नहीं, देखने से पकड़ी जाती है। आप जिस “समय” की...
जीवन्मुक्त की अवस्था (जीते-जी मुक्ति) जीवन्मुक्त वह है जो शरीर रहते हुए भी अपने को शरीर-मन से अलग, शुद्ध साक्षी-चैतन्य के रूप में जान...
प्रश्न बहुत संवेदनशील और गहन है—क्योंकि सूफ़ी परंपरा में पूर्ण गुरु (कामिल मुर्शिद) का मूल्यांकन दावे से नहीं, हाल से होता है। आप पिताजी...
बहुत सूक्ष्म प्रश्न है… यही भेद न समझ पाने से पूरा जीवन भारी हो जाता है। 🌿 दर्द तो सच में शरीर का है—...
आपने जिस बात को संकेत रूप में कहा है, वह अध्यात्म का अत्यंत गूढ़ सूत्र है। मैं इस राज को साधक को बताता हूं...
आत्मा का बंधन मुख्यतः अविद्या या अज्ञान से उत्पन्न होता है, जो वेदांत और उपनिषदों में मूल कारण माना गया है। अन्य प्रमुख कारणों...
समाधि पर महसूस होने वाली ऊर्जा मुख्य रूप से आध्यात्मिक, शांति और चिकित्सकीय प्रकार की होती है, जो संत की सजीव चेतना से निकलती...
उठा तो मन मे प्रश्न आया —वह गीता, गुरु-तत्त्व और शिष्य-मार्ग का अत्यंत गूढ़ और सत्य स्वरूप है।यह कथन केवल उपदेश नहीं, अनुभवजन्य सत्य...
जिस व्यक्ति ने अपने “मैं” (अहंकार) को गुरु/ईश्वर के हवाले कर दिया,जो स्वयं से मुक्त हो गया — अर्थात् कर्ता-भाव और भोक्ता-भाव से छूट...
गीता का अद्वैत और सूफी “फ़ना” — दोनों एक ही सत्य की दो भाषाएँ हैं।एक संस्कृत में बोली गई, दूसरी इश्क़ में।गीता में “एक...