जागृत सहस्त्रार चक्र के बाद मानसिक बदलाव मुख्यतः चेतना के विस्तार और आध्यात्मिक जागृति से जुड़े होते हैं, जैसे गहरी शांति, आत्मबोध और बाह्य...
आत्मा के सफर पर समाधि के संदर्भ में विभिन्न भारतीय आध्यात्मिक परंपराएँ और शास्त्र कुछ इस प्रकार दृष्टिपात करती हैं:1. उपनिषदों का दृष्टिकोणउपनिषदों में...
अध्यात्म में अहंकार का पतनकारी स्वरूपअध्यात्म मार्ग में अहंकार ही सबसे बड़ा बाधक है, जो साधक को भ्रम की ओर ले जाता है और...
त्रि नेत्र का अभिप्राय है तीसरी आँख या आज्ञा चक्र, जो दोनों भौंहों के बीच, माथे पर स्थित होता है। यह चक्र इड़ा, पिंगला,...
प्रिय भाई सुनील आपने जो दोहा लिखा है उसका मूल अर्थ ये है कि भगवान (प्रभु) की माया बहुत ही शक्तिशाली और बलवान है।...
“अध्यात्म की राह में ‘फिजा’ और ‘फिदा’ के अर्थ बहुत गहरे और सारगर्भित हैं। यहाँ पर ‘फिजा’ का अर्थ होता है वातावरण, मौसम, या...
दार्शनिक दृष्टि से नाद और नाम जप में यह अंतर है कि नाम जप एक क्रिया है जिसमें ईश्वर या गुरु के नाम का...
जब हम किसी भी ईश्वर को याद या उसके ड्सर्शन करते है और नाम जपते है तो हम जाप करते हुवे शांति तो अवश्य...
कर्मयोग को श्रीकृष्ण यो मूल श्लोकभगवद्गीता के अध्याय 2, श्लोक 47 में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं: कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥...
इश्क को आध्यात्मिक मार्ग में परिवर्तित करने के लिए सबसे पहले उसे संसारिक मोह से अलग कर परमात्मा या गुरु के प्रति निष्काम भक्ति...