अनाहत नाद एक ऐसी ध्वनि है जो बिना किसी टक्कर या घर्षण के उत्पन्न होती है। यह ब्रह्मांड की शाश्वत, आंतरिक ध्वनि है, जिसे...
मेरे पिताजी का कहना था जो व्यक्ति इस संसार से विरक्त हो वीतरागी या केवल्य स्तिथि अपने गुरु की मेहेर से पा लेता है...
गुरु = सूर्य की उपमा को आध्यात्मिक दृष्टि से कुछ बिंदुओं में समझिए :1. प्रकाश का दानसूर्य स्वयं जलता है और सबको प्रकाश देता...
ये शास्ट्रोनमेवलिख हैइसमें वेद-उपनिषद, गीता और स्मृति-ग्रंथों में बताए गए देवयान और पितृयान मार्गों का अच्छा सार है, और साथ ही आपने अपनी व्यक्तिगत...
आध्यात्मिक दृष्टि से शुक्ल और कृष्ण पक्ष का महत्वभारतीय आध्यात्म और शास्त्रों में, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों का ही गहरा आध्यात्मिक महत्व...
ही तू है” का अर्थ है – साधक को हर जगह वही परमात्मा, वही चेतना, वही ईश्वर दिखाई देता है।जब दृष्टि भीतर से निर्मल...
सूर्य और “ॐ”ऋग्वेद, उपनिषद और योगशास्त्र में कहा गया है कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड एक ही मूल ध्वनि “ॐ” (प्रणव) से स्पंदित है सूर्य को...
भक्ति से शुरू होकर समाधि और अंत में नाद ब्रह्म तक पहुँचना। यह मार्ग एक साधक के लिए सबसे महत्वपूर्ण और transformative (रूपांतरकारी) होता...
मनुष्य जन्म।लेने के बाद कर्म के अनुसार जन्म।लेता है और जन्म।के समय पूर्व कर्मो के अनुसार घर चुन जन्म।ले कर बड़ा होता है और...
वेदों में गुरु का महत्व और योगदान आध्यात्मिकता के संदर्भ में अत्यंत उच्च माना गया है। गुरु को आध्यात्मिक मार्ग का पथ-प्रदर्शक, ज्ञान का...