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कर्मयोग का सार: श्रीकृष्ण के उपदेश और ईश्वर-स्मरण का दिव्य मार्ग

कर्मयोग को श्रीकृष्ण यो मूल श्लोकभगवद्गीता के अध्याय 2, श्लोक 47 में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं: कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥...

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जब इश्क बन जाए आध्यात्मिक मार्ग: प्रेम से परमात्मा तक की यात्रा

इश्क को आध्यात्मिक मार्ग में परिवर्तित करने के लिए सबसे पहले उसे संसारिक मोह से अलग कर परमात्मा या गुरु के प्रति निष्काम भक्ति...

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भौतिक संसार में रहकर भी आध्यात्मिक बने रहना: कर्म योग का सुंदर संदेश

भौतिक दुनिया के कर्म करते हुए अपने को अध्यात्म में लय रखना मतलब बिना स्वार्थ के, पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कर्म करना...

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नाद ब्रह्म और ओम: दिव्य ध्वनि के दो रूपों की अद्भुत यात्रा

नाद ब्रह्म और ओम में मुख्य अंतर इस प्रकार है:अर्थ और स्वरूप:नाद ब्रह्म वह अनाहत (अघोषित) दिव्य ध्वनि है जो ब्रह्माण्ड के सर्वत्र व्याप्त...

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अनाहत नाद का रहस्य: वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि से चेतना की यात्रा

मनुष्य के मस्तिष्क का आकार भौतिक रूप से तो पृथ्वी पर ही सीमित है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से कहा जाता है कि मस्तिष्क का...

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